शनिवार, 5 नवंबर 2011

रिश्तों के बीच फेसबुक



फेसबुक आज आम आदमी की जरूरत बनता जा रहा है।मतलब रिश्तो के बीच दूरी मिटाने का माध्यम बन चुका है, सुबह उठते ही अकाउंट चेक करने के लिए जिज्ञासा बनी रहती है।फेसबुक की शुरुआत जिस उद्दे-
-श्य के साथ शुरु हुई  थी, वह पूरा हुआ भी साथ-साथ वृहद स्तर पर प्रसिद्ध भी हुआ।
जब जुकरवर्ग ने 2004 में एक दोस्तों के बीच नेटवर्क स्थापित करने के लिए इस सोशल नेटवर्किंग साइट का निर्माण किया होगा, शायद उन्होंनें इतना नहीं सोचा होगा कि हम दुनिया को एक नई सोच देने जा रहे है।
जिस नेटवर्क की शुरुआत महज चंद लोगों  के बीच हुई थी, वह धीरे-धीरे सीमाओं को लांघते हुए देश-दुनिया में पहुंची।आम आदमी जुड़ना शुरु हुआ। हम कह सकते है कि मीडिया का नया अवतार हुआ।
फेसबुक के माध्यम से हम अपने विचारों और सूचनाओ  को महज कुछ सेकेण्ड में ही हजारों की तादाद में प्रेषित कर देते है।इसके बाद मिलने वाले रिस्पांस से लोगों के विचारों से भी अवगत हो जाते है।
कुछ सार्वजनिक खाते(अकाउंट) भी बनाए जाते है,  जिन्हे हर कोई देख सकता है और नेता,स्टार, सामाजिक संगठनों की गतिविधियों  के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। फोटो शेयर करके भी बहुत बड़े जनसमूह तक अपनी सूचनाओं का प्रेषण किया जाता है, इससे आपसी संवाद भी होता है।धीरे-धीरे पब्लिक पेज बनाने की परंम्परा लोकप्रिय होती जा रही है। कभी-कभी फेसबुक पर कुछ देशों में प्रतिबंध का साया पड़ जाता है।उदाहरणार्थ  पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून बनाने के कारण पाक की एक अदालत ने 31 मई 2010 को प्रतिबंधित कर दिया था।

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