तन
को झुलसाती गरमी,
तो कभी
सर्दियों की ठिठुरन जैसे मौसम
अन्नदाता किसानों का चरणबद्ध
तरीके से इम्तिहान लेते हैं.
कई बार
तो मौसम और महंगाई इतना मजबूर
कर देते हैं कि किसान मौत की
रास्ता चुन लेते हैं.
देश
में यह समस्या आज कोई नयी है,
बल्कि
लगातार विकराल होती समस्या
है. ऐसे
में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर
पेशे को छोड़कर खेती-किसानी
को चुन लेना,
कतई
आसान नहीं है.
मधुचंदन
ने इस रास्ते पर चलने फैसला
ही नहीं किया,
बल्कि
कामयाबी की एक नयी इबारत लिख
डाली,
जो
किसानों के लिए एक मिसाल और
हमारे लिए एक प्रेरणा है.
देश की लगभग
दो तिहाई आबादी के लिए जीवन-यापन
का साधन कृषि का भारतीय
अर्थव्यवस्था में योगदान कम
होता जा रहा है.
कृषि को
जिस तरक्की के मुकाम पर पहुंचाना
था, वैसी
कामयाबी नहीं मिली.
छोटे
किसानों और कृषि मजदूरों की
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी
है कि प्रतिवर्ष हजारों की
संख्या में कर्ज में डूबे
किसान आत्महत्या जैसा बेहद
दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाते
हैं. जिस
गति से अन्य क्षेत्रों में
तकनीकी विकास का प्रसार हुआ,
उतना कृषि
के हिस्से में नहीं आ पाया.
मौसम की
मार और बढ़ती महंगाई परंपरागत
कृषि पर निर्भर किसानों को
उबरने का मौका ही नहीं देती.
इन सबके
बीच राहत की बात यह है कि कुछ
युवाओं की रुझान कृषि के
व्यवसायीकरण और कृषि उत्पादों
की मार्केटिंग की तरफ हुई है.
भले ही
आज हमें धरातल पर इसका नतीजा
न दिखें,
लेकिन
आने वाले समय में बड़े स्तर
पर इन योजनाओं के लागू होने
पर लाखों लोगों का भाग्य बदल
सकता है.नयी सोच से दिखायी उम्मीद की किरण
अगस्त, 2014 तक अमेरिकी जीवनशैली में जिंदगी जीनेवाला शख्स, जिसके पास दुनिया की कई प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने और सैन जोंस में एक कंपनी के सहसंस्थापक के रूप में अनुभव हो, उस व्यक्ति ने एक दिन कठिन जिंदगी जीने का फैसला ले लिया और कैलिफोर्निया से निकल कर कर्नाटक के मांड्या जिले को अपनी कर्मभूमि बनाया. सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में कैरियर के कई बड़े मुकाम हासिल कर चुके मधुचंदन ने अपने गृह जनपद मांड्या में 300 से अधिक किसानों के लिए उम्मीद की किरण जगायी है. मांड्या कर्नाटक का ऐसा जिला है, जहां पिछले एक वर्ष में कर्ज में डूबे अनेक किसानों ने आत्महत्या की है. मधुचंदन के आने के बाद सैकड़ों किसानों को जिंदगी जीने का एक नया नजरिया तो मिला ही है, साथ ही व्यवसायिक कृषि को भी एक अच्छी दिशा मिली है.
ऑर्गेनिक फॉर्मिंग को बनाया तरक्की का हथियार
भारत में कृषि ही करोड़ों के जीवन का आधार है. कृषि को एक नयी दिशा देने के लिए हाल-फिलहाल में कई तकनीकें प्रचलन में आयी हैं. मधुचंदन ने ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की तकनीक से लगभग 300 किसानों को जोड़ा. इस विधा से किसान उत्पादों की अच्छी कीमत हासिल कर रहे हैं. मधुचंदन ने मांड्या ऑर्गेनिक फॉर्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े 270 किसान नियमित तौर पर रिटेल आउटलेट के माध्यम से अपने उत्पादों को बेच कर एक वैकल्पिक रोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. ऑर्गेनिक मांड्या का रिटेल आउटलेट बंगलुरु-मेसुरु हाइवे पर ऑर्गेनिक सब्जियों, अनाज, दालों और अन्य कृषि उत्पादों की बिक्री करता है.
किसान के रूप में मिलती है संतुष्टि
कई आइटी कंपनियों में काम करने के बाद मधु ने 2005 में दोस्तों के साथ मिलकर वेरीफाया नाम की कंपनी की नींव रखी, मधु द्वारा विकसित ऑटोमेटेड टेस्टिंग सॉफ्टवेयर दुनियाभर में कॉरपोरेट इस्तेमाल करते हैं. मधु ने अपने प्रोफेशनल कैरियर में कामयाबी हर मुकाम पर उपस्थिति दर्ज करायी है. इस बीच मधु ने इजरायल, यूके, फिलिपींस, अफ्रीका और यूएस जैसे देशों में काम किया. बावजूद इसके मधु को जो शुकून एक किसान के रूप में मिला, वह पहले कभी नहीं मिला. मधुचंदन अपने जनपद को पूर्ण रूप से केमिकल फ्री जोन और ऑर्गेनिक डिस्ट्रिक्ट के रूप में परवर्तित करना चाहते हैं. मधु का मानना है कि जो संतुष्टि आपको एक किसान के रूप में मिलती है, वह आप दुनिया किसी भी जॉब में हासिल नहीं कर सकते हैं.
कृषि का स्वरूप बदलना जरूरी
किसान उत्पादों का सही मूल्य हासिल कर सकें, इसके लिए जरूरी है कि कम्युनिकेशन, टेक्नोलॉजी और मार्केंटिंग के तौर सहायता उपलब्ध करायी जाये. लाखों लोगों का पेट भरने के लिए दिन-रात मशक्कत करने वाले किसानों के बीच आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है. मिट्टी की उर्वरता को बरकरार रखने के लिए जागरूकता जरूरी है. मधु का मानना है कि समस्या इस बात की है कि हमारे देश में कृषि विशेषज्ञों के पास पर्याप्त सैद्धांतिक ज्ञान होता है, लेकिन व्यवहारिक ज्ञान में शून्य होते हैं. हमारे कृषि विश्वविद्यालयों में विशेषज्ञों के बजाय अनुभवी किसानों को नियुक्त करने की जरूरत है. मांड्या ऑर्गेनिक फॉर्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी में 270 किसानों के अलावा आयुर्वेद डॉक्टर और कृषि वैज्ञानिक भी हैं, जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत हैं.

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