मंगलवार, 13 सितंबर 2011

कैसे गीत सुनाऊ मै...........

कैसे गीत सुनाऊ मैं
फूट रही है चिनगारी,
कैसे आग बुझाऊ मैं............
हर नजर हमारे
ओर लगी है........
आशाओं की दीप्ति जली है.....
हास- रूदन है साथ मेरे.
सुख- दुख है कुछ खास मेरे
धन दौलत की चाह नही
यश-अपयश की परवाह नही
फिर भी इन हालातों में
कैसे मधुगीतों को
गाँऊ मैं..................फूट रही............

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