गुरुवार, 8 सितंबर 2011

दिल्ली आतंकी हमला

फिर   हम हुये शिकार..................
बुधवार को एक बार फिर आतंकी  हमले से दिल्ली दहल उठी। और हमारे नेताओं ने सहानुभूति प्रकट कर मरहम लगा दिया, और स्थिति के सामान्य होने का इंतजार कर रहे है। बार -बार  हमें 
थप्पड़ खाने की आदत पड़ गयी है,क्यों हम गाँधीवादी  है न, इसका कोइ फरक नही पड़ता।
मुम्बई और फिर दिल्ली.........बाकी का कुछ कह नही सकते, आज हालात  बद से बदतर है, हमारी
सुरक्षा में सेंध लगाना बहुत आसान हो गया है। आखिर कब तक पिसते रहेंगे और ये कानून और
सुरक्षा  में सेंध लगाते रहेंगे। आज आम आदमी को अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। आजकल पूरे दक्षिण एशिया अशांति का दौर चल रहा है, सरकारें असहाय नजर आ रही है।
सुरक्षा एजेंसियां अपने काम में तत्परता से लगी हुई है फिर भी खामी कहाँ हो जाती है यही सबसे
बड़ा  मुद्दा है। एक चोट को सहला नही पाते कि दूसरी चोट लग जाती है।

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